जीवात्मा का लक्षण -
भगवान श्रीकृष्ण ने भी जीवात्मा का लक्षण बताते हुए गीता में कहा है -
नैनं छिन्दन्ति शस्त्रणिनैनं दहति पावकः।
न चैनं क्लेदयन्त्योयो न शोषति पावकः। गीता 2/33
इस आत्मा को शस्त्र नहीं काट सकते, इसके आग जला नहीं सकती, इसको जल नहीं गला सकता और वायु नहीं सुखा सकता। इससे यही सिद्ध होता है कि- यह जीवात्मा धधकते हुए सूर्य में भी प्रवेश कर सकती है। उसकी गर्मी उसे जला नहीं सकती, जिस गृह में जल ही जल हो वहाँ इस जीवात्मा को वह- गीला नहीं कर सकता और जिस गृह में हवा तेज चल रही हो वह इसे सुखा नहीं सकता। इससे यही सिद्ध होता है कि जीवात्मा इस विशाल, असीम अन्तरिक्ष में कहीं भी जा सकता है। और उसका ज्ञान प्राप्त कर सकता है। इस मानव देह में अगर कोई मुक्ति चाहता है तो उसे पूर्ण वैराग्य का जीवन जीते हुए, छल कपटपूर्ण व्यवहार का त्याग करते हुए, निर्मल और पूर्ण ज्ञानी होने पर वह ब्रह्मानंद को प्राप्त कर सकता है। महर्षि ने ब्रह्माण्ड का ज्ञान प्राप्त करने की यह विधि बतायी है। इस शरीर के माध्यम से हम केवल जहाँ तक हमारी नजर जाती है और वैज्ञानिक साधनों की सीमा तक ही हम ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।
महर्षि ने यह भी बताया कि- लोकलोकान्तर की भाषा संस्कृत ही है। अगर आज के वैज्ञानिक संस्कृत भाषा में अन्य गृहों से सम्पर्क साधेगें तो उनको सन्देश प्राप्त हो सकते हैं। यह प्रयोग करना चाहिये। महर्षि ने सत्यार्थ प्रकाश के अष्टम और नवम समुल्लास में अन्तरिक्ष सम्बन्धी कई जानकारियाँ दी है। यह भी कहा जाता है कि- लंका का राजा रावण मंगलगृह तक जाता था। साथ ही नारद मुनि लोक लोकान्तरों की यात्रा करते थे, यह केसे सम्भव हुआ। आज का वैज्ञानिक मंगल गृह और अन्य दूरस्थगृहों की जानकारियाँ प्राप्त कर रहा है और वहाँ जाने के प्रयास में लगा है। चांद पर मानव पहुँच भी चुका है। आज मानव मंगल गृह पर पहुँचने का प्रयास कर रहा हैं। महर्षि ने जो विधि बतायी है, क्या हम वह जीवन जी सकते है।
Weapons cannot cut this soul, fire cannot burn it, water cannot melt it, and air cannot dry it. This proves that this soul can even enter the blazing sun. Its heat cannot burn it, it cannot wet this soul in a planet where there is only water, and a planet where the wind is blowing strongly cannot dry it. This proves that the soul can go anywhere in this vast, infinite space and gain knowledge of it.
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